Hantavirus को लेकर बढ़ी चर्चा, जानिए कितना खतरनाक है यह वायरस

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Hantavirus को लेकर दुनिया में बढ़ी चिंता, जानिए कितना खतरनाक है यह वायरस और भारत में क्या है स्थिति

दुनियाभर में एक बार फिर Hantavirus को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया से लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक इस वायरस को लेकर लगातार बातचीत हो रही है। हालांकि भारत के स्वास्थ्य विशेषज्ञों और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने फिलहाल देश में किसी बड़े खतरे से इनकार किया है, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की सलाह जरूर दी गई है।

Hantavirus कोई नया वायरस नहीं है। यह कई वर्षों से दुनिया के अलग-अलग देशों में पाया जाता रहा है। यह वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृन्तकों (Rodents) से फैलता है। संक्रमित चूहों के मल, मूत्र और लार के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है। जब संक्रमित जगहों की सफाई की जाती है तो वायरस धूल के जरिए हवा में फैल सकता है और सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार Hantavirus का संक्रमण आमतौर पर खेतों, गोदामों, पुराने बंद कमरों और ऐसी जगहों पर ज्यादा होता है जहां चूहों की संख्या अधिक हो। ग्रामीण इलाकों और लंबे समय तक बंद पड़े भवनों में इसका खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। गंभीर मामलों में यह वायरस फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है। कई मामलों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक Hantavirus के दो प्रमुख प्रकार माने जाते हैं। पहला Hantavirus Pulmonary Syndrome (HPS), जो फेफड़ों को प्रभावित करता है, और दूसरा Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome (HFRS), जो किडनी पर असर डाल सकता है। अमेरिका, चीन और कुछ यूरोपीय देशों में इसके मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

हाल ही में सोशल मीडिया पर Hantavirus को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलीं, जिसके बाद स्वास्थ्य एजेंसियों को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। विशेषज्ञों ने कहा कि यह वायरस COVID-19 की तरह तेजी से व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता। ज्यादातर मामलों में संक्रमण संक्रमित चूहों के संपर्क से ही होता है।

ICMR और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में Hantavirus का व्यापक संक्रमण देखने को नहीं मिला है। स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और लोगों को साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि घरों, दुकानों और गोदामों में चूहों को पनपने न दें। बंद कमरों या गोदामों की सफाई करते समय मास्क और दस्ताने पहनें। चूहों के मल-मूत्र को सीधे हाथों से न छुएं और सफाई के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज और सावधानी से इस वायरस के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। साफ-सफाई, जागरूकता और सावधानी ही Hantavirus से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।

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