गाजियाबाद में शुक्रवार को एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब जिलाधिकारी रविंद्र कुमार सरकारी काफिले और लग्जरी वाहनों को छोड़ बाइक से अपने कार्यालय पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और “तेल आयात पर निर्भरता कम करने” की अपील का असर अब प्रशासनिक अधिकारियों पर भी दिखाई देने लगा है। डीएम की यह पहल पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।
जानकारी के अनुसार, डीएम रविंद्र कुमार सुबह अपने सरकारी आवास से साधारण अंदाज में बाइक चलाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। रास्ते में लोगों ने जब जिलाधिकारी को बिना बड़े काफिले और सुरक्षा व्यवस्था के बाइक पर देखा तो कई लोग हैरान रह गए। कार्यालय पहुंचने पर कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच भी इस पहल की चर्चा होती रही।
दरअसल, प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और ऊर्जा बचत की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा था कि भारत हर साल अरबों डॉलर का तेल आयात करता है और यदि नागरिक छोटी-छोटी आदतें बदलें तो देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है।
प्रधानमंत्री की इसी अपील को गंभीरता से लेते हुए गाजियाबाद के डीएम रविंद्र कुमार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलाव की शुरुआत प्रशासन और अधिकारियों से भी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि अधिकारी खुद उदाहरण पेश करेंगे तो आम लोग भी प्रेरित होंगे।
डीएम की बाइक यात्रा का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे “सादगी और जिम्मेदारी का संदेश” बताया। कई लोगों ने कहा कि जब बड़े अधिकारी खुद ईंधन बचाने की पहल करेंगे तो समाज में इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
हालांकि इस दौरान कुछ लोगों ने डीएम के हेलमेट न पहनने को लेकर सवाल भी उठाए। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है जितना ईंधन बचाना।
गौरतलब है कि इससे पहले देश के कई राज्यों में अधिकारी और जनप्रतिनिधि साइकिल, मेट्रो और इलेक्ट्रिक वाहनों से दफ्तर पहुंचकर ईंधन बचत का संदेश दे चुके हैं। अब गाजियाबाद के डीएम की यह पहल भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी विभागों में ईंधन बचत अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए तो न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। वहीं आम जनता के बीच भी ऊर्जा संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।






