ललितपुर। उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां 78 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम गोस्वामी ने कथित रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उन्होंने न्यायालय के नाम एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें अपनी मौत के लिए तत्कालीन पुलिस अधिकारियों सहित कुल सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, राजाराम गोस्वामी वर्ष 2022 में उनके खिलाफ दर्ज हुए SC/ST एक्ट के एक मुकदमे को लेकर लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और इसकी अगली सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित थी। परिजनों का कहना है कि मुकदमे और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण वह काफी समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे।
सुसाइड नोट में राजाराम गोस्वामी ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें अपमानित किया गया, गंदा पानी पीने के लिए मजबूर किया गया, विरोध करने पर कथित रूप से बीच सड़क पर उनके कपड़े उतरवाए गए, लाठियों से मारपीट की गई और बाद में उन्हें ही जेल भेज दिया गया। उन्होंने यह भी लिखा कि वह पिछले 24 वर्षों से मानसिक और सामाजिक पीड़ा झेल रहे हैं तथा अब इस बोझ के साथ जीवन जीना उनके लिए संभव नहीं रह गया।
सुसाइड नोट में उन्होंने तत्कालीन ललितपुर पुलिस अधीक्षक रहे एलवी एंटोनी देवकुमार का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया। उल्लेखनीय है कि एलवी एंटोनी देवकुमार हाल ही में पुलिस महानिदेशक (DG) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। हालांकि, सुसाइड नोट में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने सुसाइड नोट को अपने कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि नोट की सत्यता, उसमें लगाए गए आरोपों तथा पूरे घटनाक्रम की सभी पहलुओं से जांच की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक सेवानिवृत्त शिक्षक की आत्महत्या, न्यायालय में लंबित मुकदमा और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सहित कई लोगों पर लगाए गए गंभीर आरोप शामिल हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।








