मुरादनगर। मुरादनगर डिवीजन के अंतर्गत 33/11 केवी भारत उद्योग गोयल इस्पात विद्युत उपकेंद्र पर इन दिनों डीटी (डिस्ट्रिब्यूशन ट्रांसफार्मर) मीटर लगाने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। लेकिन इस कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा लगाए गए कई श्रमिक बिना आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के ही उच्च वोल्टेज विद्युत लाइनों और उपकरणों के बीच कार्य कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार कार्यस्थल पर कई कर्मचारी बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, इंसुलेटेड ग्लव्स और अन्य सुरक्षा उपकरणों के दिखाई दिए। विद्युत कार्य को सबसे जोखिमपूर्ण कार्यों में माना जाता है, जहां एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है।
हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कार्य के दौरान कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में जिम्मेदारी विद्युत उपकेंद्र के ऑपरेटर या विभागीय कर्मचारियों पर डाल दी जाती है, जबकि वास्तविक कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराया जाता है। ऐसे में जिम्मेदारी तय करने को लेकर पहले से स्पष्ट व्यवस्था होना आवश्यक है।
सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल
विद्युत विभाग और श्रम सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी विद्युत कार्य से पहले कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और आवश्यक सावधानियां उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। यदि श्रमिकों को बिना सुरक्षा किट के कार्य कराया जा रहा है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि श्रमिकों की जान के साथ खिलवाड़ भी माना जा सकता है।
विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्न
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य खुलेआम किया जा रहा है, ऐसे में संबंधित अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या विभागीय अधिकारियों ने कार्य शुरू होने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच की थी? क्या ठेकेदार को सभी सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे? यदि दिए गए थे तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा?
पहले भी हो चुके हैं हादसे
विद्युत कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई बार गंभीर हादसे हो चुके हैं, जिनमें कर्मचारियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। ऐसे मामलों के बाद भी यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया जा रहा है तो यह बेहद गंभीर विषय है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने मामले की जांच कराए जाने तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त की जानी चाहिए, ताकि किसी कर्मचारी की जान जोखिम में न पड़े।
अब देखना होगा कि विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर किसी संभावित हादसे का इंतजार किया जाएगा।
— अटल आवाज़ न्यूज़
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