बेटे के जीवनदान से बची पुलिस अधिकारी पिता की जान: सेवा, त्याग और नए जीवन की प्रेरणादायक कहानी

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गाजियाबाद, 20 जून 2026: साहस, पारिवारिक प्रेम और आधुनिक चिकित्सा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के 52 वर्षीय सब-इंस्पेक्टर को नया जीवन तब मिला, जब उनके 26 वर्षीय बेटे ने अपने लीवर का एक हिस्सा दान कर उनकी जान बचाई। यह सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT) मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली में किया गया।

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली और साकेत के सेंटर फॉर लिवर एंड बिलियरी साइंसेज के ग्रुप चेयरमैन प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता ने किया। उनके साथ डॉ. राजेश डे, डायरेक्टर – लिवर ट्रांसप्लांट एंड बिलियरी साइंसेज, रोबोटिक सर्जरी एवं पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट ने भी अहम भूमिका निभाई।

बरेली के रहने वाले डॉ. (पीएचडी) भारत सिंह, जो एक सम्मानित पुलिस अधिकारी, शिक्षक और मार्गदर्शक हैं, पिछले 10 वर्षों से गंभीर लिवर बीमारी से जूझ रहे थे। वर्ष 2012 में उन्हें नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का पता चला था। समय के साथ उनकी बीमारी बढ़ती गई और उन्हें पीलिया तथा बार-बार भ्रम की समस्या होने लगी। कई वर्षों तक इलाज के बावजूद उनके लिवर की कार्यक्षमता लगातार कम होती गई। आखिरकार वर्ष 2024 में डॉक्टरों ने उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी।

कई अस्पतालों और विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद परिवार ने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली को चुना। जब डॉक्टरों ने लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट की संभावना बताई, तो उनके सबसे छोटे बेटे अभिषेक सिंह ने तुरंत अपना लीवर दान करने का फैसला किया। पेशे से वकील और न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभिषेक बरेली में एक कोचिंग संस्थान भी चलाते हैं और अपने पिता की तरह समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।

मामले की जानकारी देते हुए डॉ. राजेश डे ने कहा, “मरीज गंभीर एमएएसएच (MASH) से जुड़ी क्रोनिक लिवर बीमारी से पीड़ित थे और लिवर फेल होने की जटिलताओं का सामना कर रहे थे। विस्तृत जांच के बाद हमने लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया। मरीज को उनके बेटे से 902 ग्राम वजन वाला दाहिने हिस्से का लीवर प्रत्यारोपित किया गया। पूरी प्रक्रिया में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर काम किया।”

सर्जरी सफल रही और मरीज के लिवर ने धीरे-धीरे सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया। ऑपरेशन के 21 दिन बाद डॉ. भारत सिंह को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि अभिषेक को 10 दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।

प्रो. (डॉ.) सुभाष गुप्ता ने कहा, “लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट मानव संवेदनशीलता और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का बेहतरीन उदाहरण है। इस मामले में बेटे के निस्वार्थ निर्णय ने पिता की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों की सफल रिकवरी परिवार के सहयोग और अनुभवी ट्रांसप्लांट टीम की दक्षता को दर्शाती है। समय पर रेफरल और सही इलाज मिलने पर लिवर ट्रांसप्लांट के परिणाम बेहद अच्छे होते हैं।”

अपने अनुभव साझा करते हुए अभिषेक सिंह ने कहा, “मैंने हमेशा अपने पिता को दूसरों की मदद करते देखा है। चाहे पुलिस अधिकारी के रूप में हो, शिक्षक के रूप में या मार्गदर्शक के रूप में, उनका पूरा जीवन समाज की सेवा में बीता है। जब मुझे पता चला कि मैं उनकी जान बचा सकता हूं, तो मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के यह फैसला लिया। इस फादर्स डे पर मुझे खुशी है कि मैं उन्हें जीवन का सबसे बड़ा उपहार दे सका।”

स्वस्थ होने के बाद डॉ. भारत सिंह ने कहा, “एक पुलिस अधिकारी के रूप में मैंने पूरी जिंदगी लोगों की रक्षा की है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरा अपना बेटा मेरी रक्षा करेगा। मुझे सिर्फ नया लीवर नहीं, बल्कि नया जीवन मिला है। मैं अपने बेटे और मैक्स अस्पताल, वैशाली की पूरी टीम का दिल से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे मेरे परिवार, मेरी सेवा और समाज को शिक्षित करने के मिशन में वापस लौटने का अवसर दिया।”

यह सफल ट्रांसप्लांट एक बार फिर साबित करता है कि मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, वैशाली उन्नत लिवर उपचार और ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में से एक है। अनुभवी डॉक्टरों की टीम, अत्याधुनिक सुविधाओं और मरीज-केंद्रित देखभाल के जरिए अस्पताल गंभीर लिवर रोगों से जूझ रहे मरीजों को नई उम्मीद और बेहतर जीवन प्रदान कर रहा है।है।

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