अमित शाह का बड़ा राजनीतिक मिशन: 2027 और 2029 की चुनावी बिसात पर भाजपा की रणनीति

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में गिने जाने वाले Amit Shah एक बार फिर बड़े राजनीतिक मिशन पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। भाजपा के भीतर उन्हें संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और कठिन राज्यों में पार्टी का विस्तार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शाह का वर्तमान फोकस केवल एक राज्य नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों की मजबूत नींव तैयार करना है।

पिछले कुछ सप्ताहों में अमित शाह ने कई राज्यों के नेताओं और संगठन पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें की हैं। विशेष रूप से पंजाब में भाजपा संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और किसान, युवा तथा शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया गया है। भाजपा नेतृत्व का लक्ष्य उन राज्यों में भी अपनी स्थिति मजबूत करना है जहां पार्टी पारंपरिक रूप से कमजोर मानी जाती रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अमित शाह का मिशन तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—संगठन विस्तार, चुनावी प्रबंधन और विकास आधारित राजनीति। भाजपा “मेरा बूथ सबसे मजबूत” अभियान के जरिए प्रत्येक मतदान केंद्र तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ संरचना ही चुनावी जीत की सबसे बड़ी कुंजी है।

इसी के साथ अमित शाह राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की बड़ी परियोजनाओं की भी निगरानी कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने यमुना सफाई अभियान की समीक्षा करते हुए 2027 तक 59 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। इसे भी भाजपा के विकास और सुशासन एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत में भी अमित शाह की सक्रियता बढ़ी है। उन्होंने हाल में संकेत दिया कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की स्थिति बेहतर होने पर कई राज्यों से AFSPA को पूरी तरह हटाया जा सकता है। भाजपा इसे राष्ट्रीय एकीकरण और स्थायी शांति के अपने एजेंडे की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 2027 तक पार्टी का लक्ष्य उन राज्यों में संगठन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है जहां उसे अभी विस्तार की आवश्यकता है। इसके साथ ही युवा मतदाताओं, महिलाओं और लाभार्थी वर्गों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

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