लखनऊ/गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और झटका लगने जा रहा है। प्रदेश में बिजली बिल पर ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge Adjustment – FSA) के नाम पर करीब 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा। यह बढ़ा हुआ शुल्क उपभोक्ताओं के जून माह के बिजली बिल में शामिल होकर आएगा।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) के इस फैसले के बाद घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पहले से अधिक बिजली बिल चुकाना पड़ेगा। ऐसे समय में जब प्रदेश के कई जिलों में बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और आपूर्ति संबंधी समस्याओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, बिजली दरों में यह अतिरिक्त बढ़ोतरी आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गई है।
बिजली विभाग का कहना है कि बिजली उत्पादन और खरीद में बढ़ी लागत की भरपाई के लिए ईंधन अधिभार लगाया जा रहा है। हालांकि उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि लगातार बढ़ते बिजली बिलों से आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, जबकि कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति भी नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता का मासिक बिजली बिल 2,000 रुपये आता है तो उसे लगभग 200 रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं। इसी प्रकार अधिक खपत वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर और ज्यादा दिखाई देगा।
प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। ऐसे में बढ़े हुए बिजली बिल को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कई सामाजिक संगठनों और उपभोक्ता मंचों ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
फिलहाल जून माह से आने वाले बिजली बिलों में उपभोक्ताओं को ईंधन अधिभार के रूप में अतिरिक्त राशि चुकानी होगी, जिससे प्रदेशभर के करोड़ों उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित होने की संभावना है।





