गाजियाबाद की इलेक्ट्रिक बसों को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों के बीच सामने आई वास्तविक स्थिति

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गाजियाबाद की इलेक्ट्रिक बसों को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों के बीच सामने आई वास्तविक स्थिति

Ghaziabad में संचालित इलेक्ट्रिक बसों को लेकर पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों में कई प्रकार की खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। कुछ खबरों में केवल तकनीकी समस्याओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति इससे कहीं अधिक अलग और तकनीकी पहलुओं से जुड़ी हुई है। परिवहन व्यवस्था और संचालन से जुड़े कर्मचारियों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान स्थिति को समझे बिना कई स्थानों पर अधूरी सूचनाओं के आधार पर खबरें प्रकाशित की जा रही हैं।

जानकारी के अनुसार शहर में लगभग 50 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जिनमें से करीब 15 बसें फिलहाल तकनीकी निरीक्षण और सुधार कार्य के चलते अस्थायी रूप से होल्ड पर हैं। इनमें कुछ बसों में बैटरी से संबंधित तकनीकी जांच चल रही है, जबकि कुछ बसों में भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनिंग और कूलिंग सिस्टम पर प्रभाव पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 44 से 45 डिग्री तापमान में लगातार लंबे समय तक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किसी भी शहर के लिए तकनीकी चुनौती बन सकता है।

भारत में बड़े स्तर पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन एक नई व्यवस्था के रूप में शुरू हुआ था। शुरुआती चरण में बैटरी तकनीक, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स विदेशी तकनीक पर आधारित थे, जिनमें चीन आधारित सप्लाई और तकनीक की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस समय यह अनुमान लगाना आसान नहीं था कि भारतीय मौसम, धूल, अत्यधिक गर्मी और लगातार उपयोग के बाद चार-पांच वर्षों में किन प्रकार की व्यवहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अब जब ये चुनौतियां सामने आ रही हैं तो कंपनियां और तकनीकी टीमें उन्हीं कमियों को दूर करने के लिए लगातार कार्य कर रही हैं।

संचालन और तकनीकी स्तर पर जुड़े लोगों से हुई बातचीत में यह बात भी सामने आई है कि परिवहन प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार बसों के एसी सिस्टम बाहरी तापमान से लगभग 8 से 10 डिग्री कम तापमान बनाए रखने के हिसाब से डिजाइन किए जाते हैं। लेकिन शहर के व्यस्त रूटों पर लगभग हर स्टॉप पर बसों के गेट बार-बार खुलने और बंद होने, यात्रियों की लगातार आवाजाही और तेज गर्म हवा के अंदर आने के कारण बस के भीतर तापमान को पूरी तरह स्थिर बनाए रखना व्यवहारिक रूप से कठिन हो जाता है। यही कारण है कि भीषण गर्मी के दौरान एसी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसों की तकनीक अभी भारत में लगातार सुधार और अनुकूलन के दौर से गुजर रही है। जिस प्रकार शुरुआती समय में सीएनजी और मेट्रो परियोजनाओं में भी तकनीकी चुनौतियां सामने आई थीं, उसी प्रकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भी समय के साथ सुधार किए जा रहे हैं। इसे पूरी व्यवस्था की विफलता के रूप में देखना तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

जानकारी के अनुसार संबंधित कंपनी द्वारा बैटरी मॉड्यूल टेस्टिंग, थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम सुधार, सॉफ्टवेयर अपडेट, एसी यूनिट सर्विसिंग और अन्य तकनीकी सुधारों पर लगातार कार्य किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द अधिक से अधिक बसों को दोबारा संचालन में लाया जा सके।

देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की बात करते रहे हैं। केंद्र सरकार की ग्रीन मोबिलिटी नीति का उद्देश्य प्रदूषण कम करना, ईंधन पर निर्भरता घटाना और भविष्य के लिए स्वच्छ परिवहन व्यवस्था तैयार करना है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को और मजबूत करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर कार्य करना चाहिए।

वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि अधिकांश बसें लगातार शहर की सेवा में लगी हुई हैं और जो बसें तकनीकी जांच में हैं, उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से दोबारा संचालन में लाने के प्रयास जारी हैं। ऐसे में केवल आंशिक जानकारी के आधार पर पूरी परियोजना पर सवाल खड़े करना उचित नहीं माना जा सकता।

Atal Awaz का उद्देश्य केवल तथ्यों और जमीनी जानकारी को सामने लाना है, ताकि जनता तक वास्तविक स्थिति पहुंच सके। इलेक्ट्रिक परिवहन व्यवस्था देश के भविष्य से जुड़ा विषय है और इसमें आने वाली चुनौतियों के साथ-साथ हो रहे सुधार और प्रयासों को भी समान रूप से समझना आवश्यक है।

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